संघ की नियमावली

स्थानीय निधि राज्य लेखा परीक्षक सेवा संघ उत्तर प्रदेश की नियमावली

नाम
संघ का नाम "स्थानीय निधि राज्य लेखा परीक्षक सेवा संघ उत्तर प्रदेश" होगा, जिसे आगे संघ कहा गया है।

उद्देश्य
संघ के निम्नलिखित उद्देश्य होगें-

(क) स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग उत्तर प्रदेश में लेखा परीक्षक संवर्ग जिसमें लेखा परीक्षक, वरिष्ठ लेखा परीक्षक तथा सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी के पदों पर नियोजित व्यक्तियों को संगठित करना और उनमें एकता स्थापित करना और सरकार का ध्यान उनके हितों की ओर दिलाना ।

(ख) सदस्यों के लिए सेवा की उचित शर्तें सुनिश्चित कराना।

(ग) उचित और अनुशासित ढंग से सदस्यों की शिकायतों को दूर करने का प्रयत्न करना ।

(घ) मान्यता प्राप्त परिसघों, विशेष रुप से समान उद्देश्य वाले परिसघों को सहयोग देना और उन्हें संघठित करना ।

सदस्यता

(1) स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश में लेखा परीक्षक संवर्ग के अन्तर्गत कार्यरत लेखा परीक्षक, वरिष्ठ लेखा परीक्षक तथा सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी के प्रत्येक सदस्य के लिए संघ द्वारा निर्धारित प्रवेश शुल्क और मासिक अभिदान देने पर संघ का सदस्य होने का हकदार होगा, वशर्ते वह संघ के ऐसे नियमों और उप विधियों का जिन्हें समय-समय पर बनाया जाय, अनुपालन करने के लिये सहमत हो। यदि किसी सदस्य द्वारा सदस्यता/मासिक अभिदान का भुगतान नहीं किया जाता है तो उसे संघ के किसी चुनाव में भाग लेने अथवा मत देने का अधिकार नहीं होगा। प्रतिबन्ध यह होगा कि ऐसा कोई सदस्य चुनाव की कार्यवाही प्रारम्भ होने तक पूर्ण सदस्यता शुल्क/मासिक अभिदान के भुगतान कर देने पर अथवा मत देने का अधिकार नहीं होगा। प्रतिबन्ध यह होगा कि ऐसा कोई सदस्य चुनाव की कार्यवाही प्रारम्भ होने तक पूर्ण सदस्यता शुल्क/मासिक अभिदान के भुगतान कर देने पर चुनाव में भाग लेने अथवा मत देने का अधिकार प्राप्त करेगा।

(2) सदस्यता शुल्क प्रत्येक वर्ष माह अप्रैल में देय होगा ।

सदस्यता शुल्क

संघ के प्रवेश शुल्क व मासिक / वार्षिक अभिदान की दर आम सभा द्वारा निश्चित की जायेगी।

जुर्माना और समपहरण

कोई सदस्य जो एक वर्ष तक अपना मासिक अभिदान देने में विफल रहे, संघ का सदस्य नहीं रह जायगा, किन्तु वह अपने बकाया का भुगतान करने पर संघ में पुनः सम्मिलित होने का हकदार होगा।

प्रसुविधा

संघ का कोई सदस्य ऐसी कोई प्रसुविधा जिसे संघ अपने सदस्यों को देने का विनिश्चय करे तथा तब तक पाने का हकदार नहीं होगा। जब तक कि वह कम से कम 06 मास तक सदस्य न रहा हो और सभी देयों का भुगतान न कर दिया हो। संघ का ऐसा सदस्य, जिसके पास कोई बकाया है, किसी प्रसुविधा का तब तक हकदार नहीं होगा जब तक कि समस्त बकाया का भुगतान न कर दिया गया हो।

सदस्यों का रजिस्टर

संघ मे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष एवं लेखा परीक्षक होगे। संघ के पदाधिकारी वार्षिक सामान्य बैठक में संघ के सदस्यों मे से निर्वाचित किये जायेगे। लेखा परीक्षक कार्यसमिति का सदस्य नही होगा एवं संघ के लेखे की लेखा परीक्षा का उत्तरदायी होगा।

कार्य समिति-

अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव एवं कोषाध्यक्ष के अतिरिक्त कार्य समिति के "ग्यारह" अन्य सदस्य होगें, जिनका निर्वाचन वार्षिक सामान्य बैठक में संघ के सदस्यों में से किया जायेगा ।

संघ का प्रबन्ध

(1) संघ के कार्य कलापों का संचालन कार्य समिति द्वारा किया जायेगा जिसमें वार्षिक सामान्य बैठक में निर्वाचित पदाधिकारी और सदस्य होगें। कार्य समिति तब तक कार्य करती रहेगी जब तक कि नयी समिति का गठन न हो जाय।

(2) कार्य समिति का कार्यकाल निर्वाचन की तिथि से दो वर्ष के लिए होगा। यदि अपरिहार्य कारणों से उस अवधि की समाप्ति तक नयी समिति का गठन न किया जा सके तो इस कार्य समिति का समय तीन माह के लिए और बढ़ा हुआ माना जायेगा तथा इस अवधि में सामान्य बैठक आहूत करके नयी कार्य समिति का गठन करना आवश्यक होगा।

(3) यदि कार्य समितिपदाधिकारी इस प्राविधान का उल्लंघन करते है तो संघ के एक तिहाई सदस्य अध्यक्ष से नई कार्य समिति के गठन कराने हेतु आम सभा बुलाने का लिखित निवेदन कर सकते है।

रिक्तियां और हटाया

(1) यदि कार्य समिति के पदाधिकारियों में कोई रिक्ति होती है तो उसे कार्य समिति द्वारा शेष अवधि के लिए भरा जायेगा।

(2) संघ का कोई पदाधिकारी या उसके कार्य समिति का कोई सदस्य कपट करने या संघ के हितों के विरुद्ध कार्य करने के कारण सदस्यों की सामान्य बैठक द्वारा तीन चौथाई बहुमत से हटाया जा सकता है, वशर्तें हटाये जाने वाले पदाधिकारी या सदस्य को अपने आचरण का स्पष्टीकरण देने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाय।

कार्य समिति की बैठक

कार्य समिति की बैठक वर्ष में एक या दो बार ऐसे दिनांक को ऐसे संमय पर, जिसे महासचिव द्वारा अध्यक्ष के परामर्श से निर्धारित किया जाय, होगी। गणपूर्ति के लिए कार्य समिति के कम से कम एक तिहाई सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक होगी। स्थगित बैठक के लिए किसी गणपूर्ति की आवश्यकता न होगी। कार्य समिति की बैठक के लिए कम से कम तीन दिन की नोटिस दी जायेगी।

पदाधिकारियों के कर्तव्य

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष- अध्यक्ष संघ और कार्य समिति की सभी बैठकों की अध्यक्षता करेगा और उसे केवल निर्णायक मत देने की अनुमति होगी। अध्यक्ष को जब भी आवश्यक हो कार्य समिति या संघ की बैठक बुलाने की शक्ति होगी ।

उपाध्यक्ष, अध्यक्ष को उसके कर्तव्यों के पालन में सहायता देगा और उसकी अनुपस्थिति में उसके स्थान पर कार्य करेगा।

महासचिव महासचिव संघ और कार्य समिति की बैठकों का कार्यवृत्त तैयार करेगा और समस्त पत्र व्यवहार करेगा सभी बैठक बुलायेगा एवं संघ के कार्य कलापों का पर्यवेक्षण करेगा।

संयुक्त सचिव संयुक्त सचिव संघ के कार्यकलापों का संचालन करने में साधारणतया महासचिव की सहायता करेगा। वह महासचिव की अनुपस्थित में उसके कर्तव्यों का पालन करेगा।

कोषाध्यक्ष कोषाध्यक्ष ऐसी समस्त धनराशि के लिए जो संघ को समय-समय पर दी जाय और उसे सम्यक रूप से बैंक में जमा करने के लिए उत्तरदायी होगा। वह कार्य समिति द्वारा स्वीकृत सभी व्ययों का भुगतान करेगा।

सामान्य बैठक

(1) संघ की वार्षिक बैठक सामान्यतया अप्रैल या मई मास में निम्नलिखित कार्य सम्पादन के लिए होगी-

(क) संघ द्वारा कृत कार्य की रिपोर्ट और सम्परीक्षा लेखा विवरण को स्वीकार करना।

(ख) कार्य समिति के पदाधिकारियों और अन्य सदस्यों का निर्वाचन करना।

(ग) ऐसे अन्य कार्य सम्पादन करना जो अध्यक्ष की अनुमति से लाये जाय

(2) अध्यक्ष या महासचिव जब कभी आवश्यक समझे, संघ के सदस्यों की सामान्य बैठक बुला सकता है। सामान्य बैठक के लिए सदस्यों को कम से कम पन्द्रह दिन की नोटिस दी जायेगी।

(3) किसी सामान्य बैठक की गणपूर्ति के लिए कम से कम एक तिहाई सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक होगी। स्थगित बैठक के लिए किसी गणपूर्ति की आवश्यकता न होगी।

सामान्य निधि

संघ की सामान्य निधि में अभिदान और सरकार से दान, यदि कोई हो, होगा। संघ की समस्त धनराशि संघ के नाम से किसी अनुसूचित बैंक में जमा की जायेगी। लेखा का संचालन कार्य समिति के विनिश्चय के अनुसार किया जायेगा। चालू व्यय के लिए महासचिव या कोषाध्यक्ष अपने पास रु० 5000/- से अधिक नहीं रखेगा।

उद्देश्य जिनके लिये सामान्य निधि से किया जा सकता है

(क) संघ के प्रशासन के लिए, जिसके अन्तर्गत संघ की समान्य निधि की लेखा परीक्षा भी है, व्यय का भुगतान करना।

(ख) सरकार के पूर्वानुमोदन के अधीन रहते हुए कोई नियत कालिक पत्रिका चलाना जिसको कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले प्रश्नों पर विचार विमर्श करने के उद्देश्य से प्रकाशित किया जाय।

(ग) किसी ऐसे उद्देश्य को जिससे सरकारी कर्मचारियों को सामान्य रूप से लाभ होने की आशा हो बढ़ाने के लिए धनराशि का भुगतान करना।

वार्षिक लेखा परीक्षा

संघ सक्षम लेखा परीक्षकों द्वारा अपने लेखों की वार्षिक लेखा परीक्षा कराने के लिए सम्यक व्यवस्था करेगा और लेखा परीक्षा विवरण पत्र की एक प्रति उचित माध्यम से सरकार को इस प्रकार भेजेगा कि वह प्रतिवर्ष जुलाई से पूर्व मिल जाय।

लेखा बाहियो का निरीक्षण

संघ की लेखा बहिया, संघ के किसी सदस्य के निरीक्षण के लिए सुलभ होगीं।