संघ की पृष्ठभूमि

प्राक्कथन

जर्मनी के मार्टिन नीमोलर की एक प्रसिद्द उक्ति है
"पहले वे समाजवादियों के लिए आये, और मैंने आवाज़ नहीं उठाई - क्योंकि मैं समाजवादी नहीं था।
फिर वे व्यापार संघियों के लिए आये, और मैंने आवाज़ नहीं उठाई - क्योंकि मैं व्यापार संघी नहीं था।
तब वे यहूदियों के लिए आये, और मैंने आवाज़ नहीं उठाई - क्योंकि मैं यहूदी नहीं था।
फिर वो मेरे लिए आये, और किसी ने आवाज़ नहीं उठाई - क्योंकि मेरे लिए बोलने वाला कोई नहीं था।"
शायद इसी कारण संघ की ज़रुरत हुई जिससे कर्मचारियों की मांग और समस्याओं के लिए बेहतर ढंग से सुलझाया जा सके। इसी एक कड़ी के रूप में उत्तर प्रदेश शासन के शासनादेश संख्या - ऑडिट-2-641/दस-2016-350(5) 15 दिनांक 18 जून 2018 द्वारा "स्थानीय निधि राज्य लेखा परीक्षक सेवा संघ" उत्तर प्रदेश को शसन द्वारा मान्यता प्राप्त हुई।
जिसने अपने एक दशक संक्षिप्त कालखंड में विभिन्न सपनो को तय किया।

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स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के लेखा परीक्षक संवर्ग का वर्तमान संगठन "स्थानीय निधि राज्य लेखा परीक्षक सेवा संघ उत्तर प्रदेश" का गठन संघ की आम सभा दिनांक 02-08-2015 में जो लखनऊ विश्वविद्यालय के डी.पी.ए. सभागार में आयोजित हुई थी, संपन्न हुआ था| वर्तमान संघ के गठन के पूर्व इस विभाग में ऑडिट संवर्ग के हितों की रक्षा के लिए 25 सितम्बर 1941 से यू.पी. लोकल फण्ड ऑडिटर्स एंड सुपीरियर हेड ऑफिस स्टेबिलिस्मेंट एसोसिएशन था, जो 19 नवंबर1955 से "यू.पी. लोकल फण्ड ऑडिटर्स एसोसिएशन" के नाम से रहा, जो रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 की व्यवस्था के अंतर्गत था| "यू.पी. लोकल फण्ड ऑडिटर्स एसोसिएशन" के रूप में लेखा परीक्षा संवर्ग का संगठन 10-04-2015 तक कार्यरत रहा तथा प्रारम्भ से 10-04-2015 तक संघ के प्रतिनिधियों का चयन आम सभाओं के माध्यम से समय-समय पर होता रहा था| निदेशक स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के आदेश संख्या एम-145 दिनांक 10-04-2015 द्वारा संघ को आवश्यक अभिलेखन उपलब्ध करा पाने तथा शासन से मान्यता प्राप्त न होने के कारण अवैधानिक घोषित करते हुए वित्त विभाग उत्तर प्रदेश शासन को सूचित कर दिया गया|
दिनांक 10-04-2015 से विभाग के लेखा परीक्षक संवर्ग का कोई संगठन न रहने एवं संवर्ग के हितों की रक्षा के लिए विभाग तथा शासन से अपना पक्ष रखने हेतु नए संगठन के गठन की आवश्यकता के कारण संवर्गीय सदस्यों द्वारा सर्व सम्मति से 5 सदस्यीय समिति का चयन किया गया, इस समिति को विभाग तथा शासन से इस दायित्व के लिए सहमति मिली की समिति उत्तर प्रदेश (सेवा संघों को मान्यता) नियमावली - 1979 के अंतर्गत लेखा परीक्षक संवर्ग के सदस्यों का एक संघ बनाकर शासन से मान्यता प्राप्त करे| समिति द्वारा संवर्ग के सदस्यों से संघ की सदस्यता ग्रहण करने एवं संवर्ग के कुल सदस्यों के 50 प्रतिशत से अधिक सदस्यों से संघ की सदस्यता लेने के उपरांत "स्थानीय निधि राज्य लेखा परीक्षक सेवा संघ उत्तर प्रदेश के नाम से नियमावली -1979 के अनुरूप संघ का गठन किया गया तथा दिनांक 02-08-2015 को लखनऊ विश्वविद्यालय के डी. पी. ए. सभागार में संघ की आम सभा का आयोजन किया गया जिसमे संघ के पदाधिकारियों का चयन आम सभा में सर्वसम्मति से किया गया तथा संघ की नियमावली का अनुमोदन सेवा संघों की मानक नियमावली -1979 के अनुरूप कराया गया तथा निदेशक स्थानीय निधि लेखा परीक्षक विभाग उत्तर प्रदश के माध्यम से उत्तर प्रदेश शासन से मान्यता लेने हेतु कार्यवाही की गई| लगातार प्रयासों से वर्तमान संगठन को शासनादेश संख्या ऑडिट -2-641/दस-2016-350(5)/15 दिनांक 18 जून 2018 को शसन से मान्यता प्राप्त हुई|

संघ का कार्यकाल

पद नाम कार्यकाल
प्रथम अध्यक्ष श्री जय प्रकाश त्रिवेदी 02-08-2015 से 22-10-2018
प्रथम महासचिव श्री संजय कुमार वर्मा 02-08-2015 से 22-10-2018
द्वितीय अध्यक्ष श्री जय प्रकाश त्रिवेदी 23-10-2018 से 17-09-2021
द्वितीय महासचिव श्री अनिल कुमार श्रीवास्तव 23-10-2018 से 17-09-2021
तृतीय अध्यक्ष श्री हरदत्त शंकर चौबे 18-09-2021 से 12-10-2023
तृतीय महासचिव श्री सुरेश राजपूत 18-09-2021 से 12-10-2023
चतुर्थ अध्यक्ष श्री सुरेश कुमार 13-10-2023 से 05-11-2025
चतुर्थ महासचिव श्री अतुल शुक्ल 13-10-2023 से 05-11-2025
पंचम अध्यक्ष श्री सुरेश कुमार 06-11-2025 से अभी तक
पंचम महासचिव श्री अतुल शुक्ल 06-11-2025 से अभी तक
नोट – (कार्यकाल की तिथि निर्वाचित दिनांक से है)